न्यूटन का घड़ीसाज़ और कबीर का अलख निरंजन
पुस्तक विवरण
“न्यूटन का घड़ीसाज़ और कबीर का अलख निरंजन” ईश्वर, सृष्टि, चेतना और परम सत्य से जुड़े मूलभूत प्रश्नों की एक तुलनात्मक दार्शनिक पड़ताल है। यह पुस्तक पश्चिमी वैज्ञानिक एवं दार्शनिक चिंतन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है।
पुस्तक में न्यूटन के “Clockmaker God” की अवधारणा से आरंभ करते हुए ब्रह्मांड की व्यवस्था, प्राकृतिक नियमों और ईश्वर के संबंध को समझने का प्रयास किया गया है। इसके बाद भारतीय दर्शन की ओर बढ़ते हुए महर्षि पतंजलि, कबीर और आदि शंकराचार्य के चिंतन में ईश्वर, चेतना, आत्मानुभूति और परम सत्य की अवधारणाओं का विवेचन किया गया है।
पुस्तक विज्ञान और अध्यात्म को एक-दूसरे का विरोधी मानने के बजाय उनकी अलग-अलग पद्धतियों, प्रश्नों और सीमाओं को समझने का प्रयास करती है। विज्ञान जहाँ निरीक्षण, तर्क, गणित और प्रयोग के माध्यम से बाहरी जगत का अध्ययन करता है, वहीं भारतीय दर्शन चेतना, आत्म-अनुभव और अंतर्मुखी खोज को भी ज्ञान का महत्वपूर्ण क्षेत्र मानता है।
इसी संदर्भ में पुस्तक यह प्रश्न उठाती है कि क्या ईश्वर और परम सत्य को केवल बाहरी जगत के अध्ययन से समझा जा सकता है, या इसके लिए चेतना और आंतरिक अनुभव की खोज भी आवश्यक है? न्यूटन के “Clockmaker God” और कबीर के “Alakh Niranjan” के माध्यम से पुस्तक विज्ञान, दर्शन और अध्यात्म के बीच एक व्यापक संवाद प्रस्तुत करती है। पुस्तक का उद्देश्य किसी एक दृष्टिकोण को अंतिम सत्य के रूप में स्थापित करना नहीं, बल्कि पाठक को इन प्रश्नों पर स्वतंत्र और गहन चिंतन के लिए प्रेरित करना है।
श्रेणी: दर्शन / विज्ञान और अध्यात्म / तुलनात्मक चिंतन
भाषा: हिंदी
लेखक: अमृत महतो "ओजोस"
प्रकाशन तिथि: 09.08.2026
प्रकाशक: थर्ड आई पब्लिकेशन , रायपुर